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गोरखपुर में अस्पताल और ऑक्सीजन सप्लायर कंपनी के बीच हुए झगड़े में 64 बच्चो की मौत, लेकिन इल्जाम योगी सरकार पर

गोरखपुर: चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में इंसानी जान काफी सस्ती है. आये दिन देश भर में फ़ैल रहे इस्लामिक आतंकवाद, लव जिहाद, सड़क दुर्घटना, रेल दुर्घटना, आत्महत्या, क्राइम, नशीले पदार्थो के सेवन, जंक फ़ूड खाने के बढ़ते चलन, बिल्डिंग गिरने से अनेको लोग मर जाते है लेकिन देश के नागरिको, अपनी दुनिया में मस्त युवा पीढ़ी, राजनेताओ और देश के चलाने के लिए जिम्मेदार लोगो पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. देश का जिहादी मीडिया आजकल देश के किसी भी भाग में घट रही गलत घटना के लिए केवल बीजेपी सरकारों को ही जिम्मेदार बता रहा है और अन्य दलों के नेताओ को सत्यवादी राजा हरिशचन्द की औलाद बताने में लगा हुआ है.

हाल ही में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में आईसीयू और इंसेफलाइटिस के मरीजों के लिए बनाए गए वार्ड में आक्सीजन सप्लाई ठप होने से करीब करीब 60 बच्चो की दुखद मौत हो गई. इस दुखद घटना के बारे में हर मीडिया संस्थान  अपने अपने राजनितिक आकाओ के एजेंडा के अनुसार रिपोर्टिंग कर रहे है. अधिकांश मीडिया संस्थान इस घटना के लिए नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिम्मेद्दार ठहरा रहे है. लेकिन हकीकत कुछ और ही है.

हमारी जानकारी के अनुसार बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली कंपनी द्वारा बार-बार नोटिस और लीगल नोटिस दिए जाने के वाबजूद करीब 63 लाख का पेंडिंग बिल कंपनी को नहीं चुकाया. परिणामस्वरूप कंपनी ने ऑक्सीजन सिलिंडर की सप्लाई को रोक दिया जिसकी वजह से 64 बच्चे मारे गए. इसमे सरासर अस्पताल की गलती है लेकिन भारतीय राजनीति के सेक्युलर नेताओ, मीडिया संस्थानों, स्वघोषित बुद्धिजीवियों ने प्रदेश की बीजेपी सरकार को बदनाम करना भी चालू कर दिया है. भारत के खिलाफ आग उगलने वाला विदेशी मीडिया भी इस खेल में शामिल हो गया है.

इस मुद्दे पर हंगामा मचने के बाद दोषी हॉस्पिटल के खिलाफ एक्शन लिया जा रहा है. ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के खिलाफ भी मीडिया ट्रायल और पुलिस एक्शन लिया जा रहा है जो की बिलकुल गलत है. कांग्रेसी नेताओ की इस मुद्दे में भी राजनीति सूझ रही है. कांग्रेसी नेता गुलाम नवी आजाद ने(जो पूर्व स्वास्थ मंत्री भी थे) ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा भी मांग लिया. केरल में भी H1N1 और डेंगू बीमारी से करीब 420 मौते हुई है और 22 लाख लोग प्रभावित हुए है लेकिन न जाने क्यों देश की मीडिया का ध्यान इसपर नहीं गया.

हमारा विचार: भारत जैसा विशाल देश स्वास्थ सेवाओ पर अपने कुल जीडीपी का केवल 1% ही खर्च करता है. देश की आमदनी का अधिकांश हिस्सा-

  1. भ्रष्ट नेताओ की मंथली सैलरी, आवास, टेलीफोन बिल, फ्री माल, फ्री विदेश यात्रा, मेडिकल में जाता है. घपले घोटाले अलग से.
  2. काम के टाइम झख मारने वाले सरकारी बाबुओ की पॉकेट में जाता है. घूसखोरी अलग से.
  3. बैंक से लोन लेकर सारा पैसा डकार जाने वाले भ्रष्ट कारोबारियों की जेब में जाता है
  4. काम न करने वाले राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों को जाता है.

इनसब पर रोक लगाने की जरुरत है.

मै कोई हेल्थ एक्सपर्ट नहीं हूँ लेकिन मेरा मानना है की अधिकांश बीमारियाँ गंदगी और गलत लाइफस्टाइल अपनाने से होती है. इसे मै एक चार्ट के जरिये समझाने की कोशिश करता हूँ-

गंदी आदते बीमारियाँ  समाधान सामाजिक जिम्मेदारी
हमेशा मोबाइल और इन्टरनेट यूज़ करने की लत आँखों का कमजोर होना, असामन्य जीवन शैली, चिरचिराहट, तनावपूर्ण संबंध सिमित प्रयोग. कंप्यूटर/मोबाइल और लैपटॉप का यूज़ करते समय आँखों पर चश्मा जरुर लगाये वाहन चलाते समय और सड़क पार करते समय मोबाइल पर बात न करे. Earphone का भी सिमित इस्तेमाल करे. कानो को काफी नुकसान पहुचाते है.
प्रदूषित पानी का इस्तेमाल अनेको बीमारिया- जैसे अतिसार, पीलिया, इत्यादि साफ़ पानी का इस्तेमाल करे पानी बचाए
हमेशा जंक फ़ूड (पिज़्ज़ा, बर्गर, sandwitch) खाने की आदत मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह जैसी बीमारियाँ जंक फ़ूड का इस्तेमाल कम करे. घर का बना हुआ खाना सर्वोत्तम होता है घर के बचे हुए खाने को न फेके. किसी गरीब या जानवर को दे दीजिये. होटल या रेस्टोरेंट में उतना ही खाना आर्डर कर जितना आप खा सकते है
गंदगी फैलाना अनेको बीमारियाँ अपने रहने वाली जगह और आस-पास की जगह साफ़ रखे यहाँ वहा न थूके

सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करे

घटिया क्वालिटी का शराब पीना शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान. परिवार में कलह अगर संभव हो तो शराब का सेवन न करे. अगर शराब पीना ही हो तो उत्तम क्वालिटी के शराब का इस्तेमाल करे शराब के बजाये दो पैसे बचाकर अपने भविष्य को सुरक्षित करे. किसी जरूरतमंद की मदद करे.

ऐसे अनेको उपाय है. सभी को यहाँ पर बताना संभव नहीं है.

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