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दिल्ली के इस युवा अजय सेहरावत ने NDTV को धो के रख दिया

दिल्ली के रहने वाले अजय सेहरावत ने एनडीटीवी द्वारा कांग्रेस राज में किये गए घोटाले की पोल खोल दी हैं।
NDTV ने 2008 में 300 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी की और कोई भी आवाज नहीं उठी क्योंकि NDTV को कांग्रेस द्वारा ही संरक्षित किया गया था।

NDTV और कांग्रेस के कुटिल और भ्रष्ट गठबंधन अब लोगों के सामने आए हैं।

मोदी के खिलाफ CBI पूछताछ करती थी तो वो “लोकतंत्र की जीत” थी, NDTV के खिलाफ छापे पड़े तो ये “लोकतंत्र की हत्या” हो गयी . 

एनडीटीवी की दोगली पत्रकारिता के कुछ उदाहरण ये भी हैं – 

1. गोधरा कांड के बाद ये यही एनडीटीवी लगातार नरेंद्र मोदी, आरएसएस और भाजपा के खिलाफ एकसूत्री एजेंडा चलाता रहा है। यह किसके इशारे पर किया जाता रहा है क्या किसी से छुपा है?

2. एनडीटीवी के मालिक प्रणव रॉय के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई को बदले की भावना बताने वाले बुद्धिजीवी, पत्रकार और नेता बता सकेंगे कि गुजरात के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए एक मुख्यमंत्री को किस हैसियत से तब सीबीआई ने 9 घंटे तक पूछताछ की थी।
3. एक तरफ, उत्तर प्रदेश के दादरी में अखलाक की मौत पर खूनी आंसू बहाने वाला यह चैनल और इसका एंकर ब्लैक स्क्रीन कर रहा था तो दूसरी तरफ इसी दिल्ली में डॉक्टर पंकज नारंग की अवैध बांग्लादेशियों द्वारा की गई हत्या को रोड रेज बताने से नहीं चूका। इन बुद्धिजीवियों की मानें तो एक की हत्या आपराधिक साजिश थी और इससे धर्मनिरपेक्षता का गला घोंटा गया तो दूसरे की हत्या से देश में लोकतंत्र मजबूत हुआ।
4. एनडीटीवी एक दिन में नहीं बना तो नरेंद्र मोदी भी एक दिन में प्रधानमंत्री नहीं बने और न ही भारती य जनता पार्टी एक दिन में संसद में बहुमत में आई है। इसे रोकने के लिए कैसे-कैसे सत्ताधारी नेताओं और इसके चमचे बुद्धिजीवियों, पत्रकारों ने खुले एजेंडे के तहत भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इसके आनषांगिक संगठनों के पीछे सत्ता का बेजा इस्तेमाल किया वो किसी से छुपा है क्या?
4. एक खास विचारधारा के लोग और बुद्धिजीवी दिनरात भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ किस तरह का व्यवहार करते रहे हैं, ये किसी से छुपा है क्या?
5. देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में किस तरह से बुद्धिजीवियों और चापलूसों को पिछले 70 सालों में सत्ताधारियों ने भरा है, इस पर भी कुछ कहना है।
6 . एनडीटीवी और भ्रष्टाचार का मामला एक दिन का नहीं है। यह पिछले कई सालों से चर्चा में रहा है, लेकिन सत्ताधारियों से संबंध के कारण इन लोगों ने हमेशा से जांच में बाधा डाली और एक तरह से जांच एजेंसियों का माखौल उड़ाने का काम किया है।
7. दूसरे को गलत बताने से आपका अपराध कम नहीं हो जाता है। छापा संस्थान के मालिक पर पड़ा है, लेकिन बिलबिलाहट वामपंथी बुद्धिजीवियों  और इस विचारधारा के समर्थकों में साफ तौर पर देखी व महसूस की जा सकती है।
8. ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवियों के अनुसार, इस देश में लोकतंत्र एनडीटीवी के कारण ही है वरना सभी मीडिया संस्थान मोदी के हाथों बिक चुके हैं. जिस तरह से आप दूसरे संस्थानों के एंकरों और मालिकों को लगातार टार्गेट करते रहे हैं उससे आपका एजेंडा साफ दिखता है। सच पूछिए तो आप सबके चेहरे से नकाब उतर चुका है और आपकी हालत खिसियानी बिल्ली खंभा नोंचे की तरह है।
9. इस देश में हर अपराधी कानून का फंदा में फंसने के बाद इसे विरोधियों और सरकार की साजिश बताते नहीं थकता, लेकिन मुद्दे से जुड़े व जानकार लोगों को सबकी हकीकत मालूम रहती है।
10. सोशल मीडिया के इस दौर में आप कितने भी चालाक क्यों न हों, ज्यादा समय तक अपने एजेंडा को चला नहीं सकते और अगर चलाते हैं तो लोग आपकी समझ को अच्छी तरह से जानते हैं। इसलिए चिल्ल-पों करने की बजाए अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई न्यायालयों में दिया करिए।
11. आपसे उन्हीं तत्वों को सहानुभूति हो सकती है, जिन्होंने आपसे लाभ लिया या पाया है। देश का बहुमत आपके साथ नहीं है, क्योंकि आप एक एजेंडे के तहत वर्षों से काम कर रहे हैं और अब जाकर आपकी पोल खुलनी शुरू हुई है।

NDTV की ‘पवित्रता’ पर सवाल मत उठाओ!

NDTV के प्रणय रॉय के खिलाफ सीबीआई की रेड को छोटे पांडे जी बदले की कार्रवाई बता रहे हैं। वो मोदी से कह रहे हैं कि एनडीटीवी एक दिन में नहीं बना। ये बात वो शख्स और चैनल कह रहा है जो खुद दिन-रात प्रधानमंत्री के खिलाफ बदले की भावना से ही ख़बरें चलाता है। अगर एनडीटीवी एक चैनल होकर दिन में नहीं बना तो मोदी क्या आटे की थैली में कूपन निकलने से देश के प्रधानमंत्री बने हैं? आपने तो एक चैनल बनाया है वो शख्स तो 4 बार मुख्यमंत्री बना है और आज देश का प्रधानमंत्री है। 2002 से लेकर आज तक हज़ारों घंटे लगा दिए भाई आप लोगों ने उनके खिलाफ ख़बरें चलाते-चलाते कुछ हुआ क्या?

देश का मीडिया हो सकता है बिका हुआ है…मैं भी बिका हो सकता हूं मगर एक लोकतंत्र में किसी नेता का चुनाव तो जनता करती है…क्या वो जनता भी बिकी हुई है?  आपके हिसाब से एक चैनल के खिलाफ एक कानूनी मामले में सीबीआई की रेड मीडिया का गला घोंटना है मगर इन्हीं मोदी से सीबीआई ने मुख्यमंत्री रहते 9 घंटे तक पूछताछ की थी, वो क्या था?

क्या तब एनडीवी ने ये ख़बर चलाई कि कांग्रेस सीबीआई का गलत इस्तेमाल कर लोकतंत्र का गला घोंट रही है। अगर सीबीआई को एक मुख्यमंत्री से 9 घंटे तक पूछताछ करने का हक है, तो वही सीबीआई एक चैनल के मालिक के यहां रेड क्यूं नहीं मार सकती?

दरअसल दिक्कत ये है कि जब आप खुद को खुद ही पवित्र मान बैठते हैं, तो आप खुद का कानून से किसी आरोप से भी ऊपर मान बैठते हैं जैसे उस दिन निधि राजदान मान बैठी थी। अगर संबित पात्रा ने ये कहा कि आपका एजेंडा है, तो इसमें इतना तिलमिलाने की क्या बात थी?

रवीश बाबू जब खुद एंकर होकर दिन-रात मीडिया को गोदी मीडिया कहते हैं, तब क्या वो उसी पत्रकार बिरादरी की नैतिकता पर सवाल नहीं उठा रहे होते? अब ऐसा कैसे हो सकता है कि रवीश को तो पूरी मीडिया पर सवाल उठाते हुए खुद को पवित्र मानने का हक है मगर एक नेता को नहीं है। अगर रवीश को ये लगता है कि जिस भी मीडिया का एजेंडा है उस पर सवाल करने ही चाहिए तो हो सकता है कि ऐसा ही कुछ उस दिन संबित पात्रा को भी लगा हो।

दरअसल ये वो दौर है जब हर पापी खुद के expose होने पर ‘मेरे खिलाफ षड्यंत्र हो रहा है’  का नारा लगाकर खुद को पवित्र बताने की कोशिश करता है। ऐसी ही कोशिश लोग याकूब जैसे आतंकी को लेकर भी कर चुके हैं, एनडीटीवी तो फिर भी 2 परसेंट टीआरपी वाल एक कथित चैनल है।

One comment

  1. Tarun Kumar Talukdar

    Every words is right. Nation get all information now public give d result to Congress very nice.

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