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कांग्रेस ने ही देश को आजाद करवाया और विकास किया- सोनिया गाँधी

नई दिल्ली: अंग्रेजो ने करीब 200 सालो तक भारत पर आज किया. भारत को आजाद कराने में अनेक देशभक्त भारतीयों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी. लेकिन इटली से भारत देश में आकर बसने वाली एक भ्रष्ट विदेशी महिला और कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी के अनुसार- केवल कांग्रेस ने ही देश को आजाद करवाया है और देश को यहाँ तक पहुँचाया है. भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर संसद में दिए अपने भाषण में सोनिया गांधी ने इशारों-इशारों में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का आजादी दिलाने में कोई योगदान नहीं रहा है. लगता है सोनिया गांधी यह कहना चाहती थीं कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं (जो भारतीय के रूप में आजादी के लिए लड़ रहे थे) के आजादी की लड़ाई के दौरान जेल जाने के बदले उनकी पार्टी को ‘भारत’ दे दो। खैर, ‘शहजादे’ (राहुल गाँधी जो अपनी मूर्खतापूर्ण बयानों के लिए बदनाम है) भी तो दादी(इंद्रा गाँधी) और पापा(राजीव गाँधी) की शहादत के बदले कुर्सी पाने की चाहत रखते हैं। हमारे देश में कुछ नेता लोग अपनी पौरुषहीनता के बावजूद अकर्मण्यता को छिपाकर भारत को एक पार्टी का ‘गुलाम’ बनाने के लिए बार-बार पापा-दादी का सहारा लेकर राजनीति को ‘राज करने की नीति’ बनाने में लगे हैं। पिछले 70 साल में कांग्रेसी सरकारों द्वारा किये गए घपले-घोटाले, मुस्लिम तुष्टिकरण, देश से गद्दारी, हिन्दुओ के दमन, कांग्रेसी नेताओ की रासलीला पर उनके मुहं का शटर बंद ही रहा, खुला नहीं.

कांग्रेस की परेशानी क्या है?

2014 में भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी के हाथों करारी हार झेलने वाली कांग्रेस खुद अपनी मुर्खता की वजह से इतिहास बनने के कागर पर है. जहा तक देश की आजादी की बात है तो आजादी की जंग लड़ने वाली काँग्रेस तो शास्त्री जी की मौत के बाद ही खत्म हो गई थी । काँग्रेस आजादी की जंग का श्रेय लेने की जोरदार कोशिश करती है लेकिन कभी इस इस्लामिक आतंकवाद प्रेमी दल ने भारत विभाजन की जिम्मेदारी ली है जिसमे कांग्रेस के ठरकी और सत्ता के लालची नेताओ की वजह से देश तीन टूकड़ों में बाँट दिया गया और भारत की धरती पर विदेश से आये मुसलमानों के लिए अलग देश बनाने के लिए करीब 30 लाख हिन्दुओ और सिखों का क़त्ल किया गया था? काँग्रेस की नाकामी के कारण ही जिहादी मुसलमानों ने लाखों महिलाओं के अपहरण और बलात्कार की घटिया कार्यवाही को अंजाम दिया. अगर काँग्रेस आजादी का श्रेय लेना चाहती है तो उसे विभाजन के कारण हुई लाखों लोगों की हत्या, बरबादी और तकलीफों की जिम्मेदारी भी लेने की हिम्मत दिखानी होगी. अगर काँग्रेस नेहरू गाँधी के तथाकथित काम का श्रेय लेना चाहती है तो उसे उनकी भयानक गलतियों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिये

वर्तमान भारत के 95 प्रतिशत से ज्यादा लोग आजादी के बाद पैदा हुए है और ये सभी लोग भारत के इतिहास की कडवी यादो को भुलाकर वर्तमान में जी रहे हैं और ये लोग चाहते है कि राजनीतिक दल उनकी वर्तमान समस्याओं की बात करे और इन समस्याओं का हल करें।

लेकिन सोशल मीडिया, इन्टरनेट और 24 घंटे चलने वाले न्यूज़ चैनल्स के ज़माने में भी कांग्रेस जनता को मुर्ख समझती है. इन्हें देश के वर्तमान हालात से कुछ लेना देना नहीं है. भारत के लिए अच्छी बात ये है की मोदी सरकार देश की मुख्य समस्याओं भूखमरी, कुपोषण, भष्ट्राचार, अशिक्षा और साम्प्रदायिकता, बेरोजगारी को जड़ से समाप्त करके 2022 तक नये भारत का निर्माण करने के लिए अथक प्रयास कर रही है. जहा प्रधानमंत्री देश की समस्याओं से लड़ने के लिये विपक्ष को राजनीति से ऊपर उठने की गुजारिश करते नजर आते हैं और “सबका साथ सबका विकास” की बात करते है वही कांग्रेसी नेता और उनके तलवे चाटने वाले चमचे आये दिन मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दू विरोध की राजनीती करते दिख जाते है.

काँग्रेस को ये भी याद रखना चाहिये कि संघ की स्थापना 10-15 लोगों के प्रयासों से 1925 में हुई थी और संघ अपने आप में बिलकुल नए तरह का विचार था. 6 अप्रैल 1930 को असहयोग आन्दोलन शुरू हुआ तो संघ के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार जी ने संघचालक का दायित्व डॉक्टर परांजपे को सौंपकर अनेक स्वयंसेवकों के साथ आंदोलन में कूद पड़े और 9 माह का सश्रम कारावास काटा।

जब ‘कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारियों के बाद जब भारत छोड़ो आंदोलन दिशाहीन हो रहा था तो दिल्ली के संघ के प्रांत संघचालक ने अपने घर में  क्रांतिकारियों को जगह दी उनकी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा।  अगर आप भारत के इतिहास को ध्यान से पढेंगे तो आपको पता चलेगा की डॉक्टर हेडगेवार को क्रांतिकारियों के बीच कोकीननाम से जाना जाता था। भारत सरदार पटेल,सुभाष चन्द्र बोस, लाला लाजपत राय, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद और अन्य स्वतन्त्रता सैनानियों को भूला नहीं है लेकिन काँग्रेस ने हमेशा ये कोशिश की कि गाँधी-नेहरू के अलावा कोई भी नेता देश को याद न रहे। इसी मकसद को पूरा करने के लिए देश भर में अनेक मत्वपूर्ण जगहों, इमारतो, एजुकेशनल संस्थानों के नाम केवल कांग्रेसी नेताओ के नाम पर रखे गए है.

ऐसा लगता है कांग्रेस इतिहास में ही खुश रहना चाहती है लेकिन जयराम रमेश जैसे कांग्रेसी नेता कांग्रेस को सुधर जाने की चेतावनी दे रहे है. मोदी सरकार और देश के अन्य राज्यों में बीजेपी सरकार बनने के बाद काँग्रेस नकारात्मक राजनीति करती आ रही है और इसका ही दुष्परिणाम है कि काँग्रेस सिमटती जा रही है ।

अगर कांग्रेस अपनी साख को बचाए रखना चाहती है तो उसे वर्तमान में लौटना होगा. जनता की समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करके नये रूप में सामने आना होगा और केवल मोदी विरोध के बजाये मोदी की नीतियों और कार्यक्रमों का विकल्प जनता के सामने लाना होगा. कांग्रेस भष्ट्राचारी और वंशवादी नेताओं के दम पर प्रधानमंत्री मोदी का मुकाबला कभी भी नहीं कर सकती.

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