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क्या रूस और अमेरिका सीरिया में सैन्य टकराव की तरफ बढ़ रहे है?

रूस और अमेरिका दुनिया की दो महाशक्तियां है। दोनों देशों के पास मजबूत सेना, अत्याधुनिक हथियार, लड़ाकू विमान, टैंक और परमाणु हथियार है। दोनों देश वैचारिक, राजनितिक और इंटरनेशनल डिप्लोमेसी में एक दूसरे के कट्टर विरोधी है।

 

मुस्लिम देश सीरिया में  2011 से चल रहा गृह युद्ध बाहरी देशो के दखलंदाजी की वजह से ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका और इसके पिछलग्गू देश असद सरकार को सत्ता से जबर्दस्ती हटाना चाहते है जबकि रूस और ईरान राष्ट्रपति असद को सत्ता में बनाये  रखना चाहते है।

 

पूरी दुनिया में आतंकवादी पैदा करने वाला देश मुस्लिम आतंकवादी संगठन ISIS के माध्यम से असद सरकार को सत्ता से बेदखल करना चाहता है। लेकिन रूस सैन्य मदद से सीरिया की सेना न सिर्फ मुस्लिम आतंकवादियों का सफाया कर रही है बल्कि पूरी दुनिया में इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की नकली लड़ाई का भांडाफोड़ भी कर रही है।

 

अपनी योजना में नाकाम रहने पर अब अमेरिकन सेना सीरिया के सैनिको को निशाना बना रही है। हाल ही में अमेरिकन आर्मी के एक लड़ाकू जहाज को मार गिराया।

 

हमले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए रूस ने अमेरिकी सेना के साथ सीरिया में टकराव रोकने के लिए किया गया समझौता तोड़ दिया है। हमले की पूर्व सूचना देने के लिए बनाये गए इमरजेंसी हॉटलाइन को भी रूस ने बंद कर दिया है।  रुसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को खुली धमकी देते हुए कहा-अगर अमेरिकन आर्मी का लड़ाकू विमान रुसी सेना की कार्यवाही में बाधा डालेगा तो उसे मार गिराया जाएगा।

 

रूस के कड़े रूख के बाद सीरिया में अमेरिका और रूस के बीच सैन्य टकराव का खतरा पैदा हो गया है जिससे सारा विश्व तनाव में है।

 

रूस लगभग हर इंटरनेशनल इशू पर अमेरिकन दादागिरी का विरोध करता है। यूक्रेन में रूस समर्थित सरकार का तख्तापलट करने, रूस पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाने, सीरिया में इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ावा देने, रुसी सीमा के नजदीक NATO (सैन्य संगठन)  सेनाओं और खतरनाक मिसाईल तैनात करने जैसी वजहों से रूस और अमेरिका के सम्बन्ध पहले से काफी ख़राब है। अमेरिकी गुंडागर्दी का जवाब देने के लिए रूस ने भी अनेक कदम उठाये है जैसे-

  1. रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले देशों से होने वाले फ़ूड आइटम्स के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है और देश में कृषि के विकास के लिए अनेक प्रोग्राम चालू किये गए है।
  2. रूस अमेरिकन डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। अपनी करेंसी को सपोर्ट करने के लिए रूस बड़ी तेजी से सोना जमा कर रहा है।
  3. रूस सीमा पर खतरनाक मिसाईल की तैनाती कर रहा ताकि सैन्य हमले की सूरत में अमेरिकन आर्मी और NATO को बर्बाद किया जा सके।
  4. आर्थिक मोर्चे पर रूस चीन, ईरान, भारत और अन्य देशों से करार करके अपनी खस्ताहाल अर्थव्यवथा को सुधारने का प्रयास कर रहा है।
  5. यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर रूस ने भी एक आर्थिक संगठन बनाया है।
  6. रूस में अमेरिकन उत्पादों का बहिष्कार किया जा रहा है।

अगर रूस और अमेरिका के बीच सीधी लड़ाई होती है तो पूरी दुनिया में तबाही मच सकती है। दोनों देशों के पास खतरनाक परमाणु हथियार है जो पूरी दुनिया को एक झटके में ही समाप्त कर सकते है।

 

रूस के साथ सैन्य टकराव से बचने के लिए अमेरिका और वेस्टर्न कन्ट्रीज को रूस के हाथ संवाद करना चाहिए। आर्थिक प्रतिबन्ध, कोल्ड वार और रूस के खिलाफ नकारात्मक प्रचार करने से अमेरिका और उसके चमचे देशो का कोई भला नहीं होने वाला है।

हम आशा करते है कि रूस और अमेरिका में कोई सैन्य टकराव न हो।

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