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अमेरिका और रूस के संबंधों में नई गिरावट-आर्थिक प्रतिबंधों के जवाब में रूस ने 755 अमेरिकी डिप्लोमेट्स को देश से निकाला

मॉस्को, रूसअमेरिका और रूस के पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों में और कड़वाहट आ गई है। अमेरिका और रूस देश दुनिया के विभिन्न मुद्दों पर एक दूसरे से अलग राय रखते है और यही कारण है कि दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती ही जा रही है।

 

यूक्रेन संकट की वजह से 2014 में अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे जैसे देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया था रूस ने भी अपनी तरफ से इन देशों आर्थिक प्रतिबंध लगाया था। सीरिया में असद सरकार को सैन्य सहायता देने से अमेरिका और इसके पिछलग्गू देश पहले से ही रूस से चिढ़े हुए है लेकिन रूस की बेमिसाल सैन्य शक्ति के आगे ज्यादा उछल-कूद नही मचाते है।

 

अमेरिका के सेक्युलर राजनेता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की जीत से अभी तक सदमे में है। FBI, अमेरिकन मीडिया, अमेरिकन पुलिस, लॉ एनफोर्समेंट एजेंसीज और सेक्युलर राजनेताओ के क्रिमिनल गैंग का यह मानना है कि 2016 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की जीत में रूस का हाथ था। रूस ने ही हिलैरी क्लिंटन का बेड़ा गर्क किया।

 

अमेरिकी चुनावी के तथाकथित रुसी हस्तक्षेप, सीरिया और यूक्रेन विवाद में रूस की भूमिका और रुसी राष्ट्रपति के प्रति अपने नफरत को और बढ़ाते हुए अमेरिकी सीनेटरों ने रूस, नार्थ कोरिया और ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबन्ध लगाये है। मजे की बात ये है कि रूस पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाने के संदर्भ में लाये गया बिल डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन सांसदों ने मिलकर पूर्ण बहुमत से पास किया था और अमेरिकी राष्ट्रपति का वीटो पावर भी इसे नहीं रोक पाता। मजबूर होकर डोनाल्ड ट्रम्प ने बिल पर sign कर दिए है जिससे रूस भड़क गया है।

 

रूस से करीब 755 अमेरिकन डिप्लोमेट्स को देश छोड़ने का निर्देश दिया है और मॉस्को में 2 अमेरिकन प्रॉपर्टी भी रुसी सरकार ने जप्त कर लिया है। संबधो में और गिरावट आने की आशंका है।

 

हमारा विचार: रूस और अमेरिका दुनिया की दो महाशक्तियां है। अमेरिका पूरी दुनिया पर किसी भी कीमत पर अपनी दादागिरी कायम रखना चाहता है और रूस अपने खोये रुतबे को पाने के लिए पूरी दुनिया में अमेरिकी गुंडागर्दी का विरोध करता रहा है।

 

रूस और अमेरिका के बीच की यह लड़ाई हाल फिलहाल ख़त्म नहीं होने वाली है। रूस के शक्तिशाली देश होने की वजह से अमेरिका उसपर अन्य देशों की तरह डायरेक्ट मिलिट्री अटैक भी नहीं कर सकता।

 

अमेरिका अपने फायदों के लिए दूसरे देशों का इस्तेमाल करता है। पूरी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे सैन्य टकराव में अमेरिका अपना फायदा देखता है और घातक हथियारों का निर्यात करके विवाद को और बढ़ावा देता है। पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा इस्लामिक आतंकवाद के फैलने में अमेरिका का बहुत बड़ा योगदान है।

 

इस बार मामला जरा गड़बड़ है। अमेरिका प्रतिबंधों की जद में यूरोपियन कंपनियों के आने से यूरोपियन यूनियन अमेरिका से चिढ़ गया है और जवावी आर्थिक प्रतिबंधों की चेतावनी दे रहा है। अगर ऐसा हुआ तो ये अमेरिका के लिए नई समस्याएं खरी कर सकता है।

अमेरिका दुनिया के हर देश पर अपनी दादागिरी नहीं चला सकता है। यह बात उसे अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए।

पूरी घटना को समझने के लिए ये वीडियो देखें-

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